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छोटानागपुरी (झारखंडी) : मुण्डारी पारम्परिक गीत-संगीत ... 

मुण्डारी पारंपरिक गीत संगीत के प्रकार :

  • करम रबल करम

  • हम्बल करम

  • खेमटा

  • जदुर 

  • ओर जदुर

  • मागे

  • ओर मागे

  • गेना 

  • जपी – फगुआ

  • चिट्टीद

  • हकन- झोका

  • आड़न्दि- शादी

  • बाला- शादी पूर्व

  • जाली –  गीत

  • सोहराई- दीवाली (बंगला)

  • पाईका- नटवा

झारखंड प्रांत के  मुख्य जनजातियों मेँ ‘मुंडा’ प्रमुख जातियों मे से एक है। झारखंड मे मुंडा जनजाति का स्थान तीसरा है । हर भाषा की तरह मुंडा जनजाति की अपनी  भाषा एव संस्कृति है। भारत के आदि भाषा एवं संस्कृति होने के बावजूद लिखित तत्वों का अभाव खलता रहा । मेरा मानना है कि आदिम जनजाति सामाजिक परिस्थितियो के दबाओ मे आकर अपने मार्ग से भटक रहे हैं और कुछ जनजाति लूप्त प्राय है। हमारी कोशिश है कि आने वाली पीढ़ी को अपने समाज, अपने संस्कृति के बारे जागरूक करें।
मुंडा जनजाति दक्षिणपूर्व एशिया के aashtralayad प्रजाति की एक विशिष्ट जाती है। झारखंड के घनी आबादी के अलावा बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़, उड़िसा, असम, त्रिपुरा निवास करती है। ऐसा माना जाता है की मुंडाओं का प्रवेश भारत के उत्तर-पश्चिम भाग से आजमगढ़ ,बुदेलखंड तथा रोहतासगढ़  होते हुए छोटानागपुर आए।

गुरु मुण्डा द्वारा रबल करम गीत की प्रस्तुति

हम्बल करम गीत

जादुर गीत

मागे राग 

गेना राग 

खेमटा गीत

ओर जादुर

ओर मागे राग

जपी फगुआ राग

चिट्टीद राग

हकन-झोका राग

आड़ंदी-शादी गीत

पाईका गीत

बाला-शादी पुर्व राग

रबल करम गीत