Indian Classical 

शास्त्रीय संगीत भारतीय संगीत का अभिन्न अंग है। हर स्वर, ताल और रागों को पूरे नियमों के साथ पालन करके गाए जाने को भारत का शास्त्रीय संगीत या Classical Music कहते हैं। शास्त्रीय गायन स्वर-प्रधान होता है, शब्द-प्रधान नहीं। इसमें महत्व ध्वनि का होता है शब्द और अर्थ का विशेष महत्व नहीं होता। शास्त्रीय संगीत को अनुभवी कान ही समझ सकते हैं। अनेक लोग, खास कर young generation शास्त्रीय संगीत से जल्द ही ऊब जाते हैं पर इनके ऊबने का कारण शास्त्रीय संगीत या संगीतज्ञ की कमजोरी नहीं, लोगों में जानकारी की कमी है। शास्त्रीय संगीत भारतीय संगीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।हिंदुस्तान के किसी प्रकार के संगीत में निखार लाने के लिए शास्त्रीय संगीत बेहद जरूरी है। शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में अच्छी तरह से स्थापित और प्रतिष्ठित कलाकारों को कुछ खिताब जैसे 'उस्ताद' और 'पंडित' का सम्मान दिया जाता हैं। शास्त्रीय संगीत की शिक्षा के लिए भारत में कई विश्वविद्यालय हैें, जिनमें प्रमुख रूप से प्रयाग संगीत समिति (इलाहाबाद ), प्राचीन कला केंद्र (चंडीगढ़) तथा बंगीय संगीत परिषद (बंगाल) है, जिसके अधीन लगभग पूरे उत्तरी भारत में लोग शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त करते हैं और Diploma /Degree हासिल करते हैं। इन विश्वविद्यालयों से Degree /Diploma हासिल करने पर School, College या अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में संगीत शिक्षक बन सकते हैं।

 

देश-विदेश में कार्यक्रम प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे अच्छा खासा नाम, शोहरत और रोजगार कमा सकते हैं। भारत के स्वतंत्र होने के बाद से ही संगीत का प्रचार-प्रसार बढ़ गया है School/ Collage तथा पाठ्यक्रम में भी सम्मिलित हो गया, संगीत का प्रचार पूरे विश्व में दिन-ब-दिन बढ़ रहा है, जिसमें भारत सबसे आगे है। हमारी कोशिश होगी कि हमारी इस वेबसाइट www.bimma.in के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक शास्त्रीय संगीत की जानकारी प्राप्त हो। और, जिन लोगों को सम्पूर्ण शास्त्रीय संगीतज्ञ नहीं बनना है, जिनहे सिर्फ सफल गायक या वादक बनना है, उन लोगों को शास्त्रीय संगीतका ज्ञान देते हुए उतना ही अभ्यास कराना है, जितना की एक सफल गायक/वादक को होना चाहिए। जैसे-अलंकार का अभ्यास, रागों की पहचान, ताल की पहचान और स्वर को संवारने में निपुणता। हमारी इस वेबसाइट : www.bimma.in में सभी विश्वविद्यालयों के syllabus सिलेबस दिए गए हैं। इच्छुक व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार इसका उपयोग कर सकते हैं। हम समय-समय पर अपने subscribers को और भी संबंधित जानकारी उपलब्ध कराते रहेंगे।

Music that is sung and played by strictly following the rules of notes, rhythm, melody and harmonyis called Classical Music of India or ‘Shastriya Sangeet’ in India. Despite its strong technical connection and a tendency to follow established rules in music, Classical or Shastriya Sangeet is extremely pleasing to the ears.

 

Though Indian Classical Music offers a lot of scope for improvisation, musicians & artists can do so while following the rules and guidelines of such music. Ragas are the guiding force behind melodies in Indian music and musicians have the liberty to improvise after selecting the basic raga and taal format.

 

Classical Music forms an important part of Indian Music in India. Shastriya Sangeet is a well art form in India and is widely popular especially with those sections of the society who have an ear for such music. Well established and distinguished performers in the field of Classical Music are bestowed with titles to their names as a mark of respect. Some of the common titles include ‘Ustad’ and ‘Pandit’, among others.

 

Some of the instruments associated with Classical Music include the Veena, Sitar, Bansuri. Sarangi, Sarod, Shehnai, Tabla and the Harmonium.

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