Indian Classical Instrumental

शास्त्रीय संगीत - हारमोनियम

A harmonium is a keyboard instrument similar to an organ. It blows air through the air vessels (reeds), producing musical notes. The harmonium sounds like an accordion.The Harmonium was invented in Europe at Paris in the year 1842 by Alexandre Debain, though there was concurrent development of similar instruments elsewhere.There are two sorts of harmonium. In a foot-pumped harmonium, the player pumps a foot pedal which operates a bellows that sends the air to the reeds.A hand-pumped harmonium has a hand bellows that blows the air. It is used in music of India, Pakistan, Nepal and Afghanistan and is also used in other Asian countries. In a foot pumped harmonium both hands are free to use the key board. In a hand pumped harmonium only one hand can be used.

Very skilled players pump enough air with one hand, remove it and play with both hands wherever necessary. It is used as an accompanying instruments in classical Hindustani music, Sufi music, bhajan singing, musical renditions of the classics and a variety of genres. nomadic singers string it and wear it around their shoulders and go from village to village taking part in village fairs and festivals. The Harmonium is a small, manually-pumped musical instrument using fixed reeds to create the basic sounds. There are two main types of harmonium: a foot-pumped version that resembles a small organ, and a hand-pumped portable version that can fold up for easy transport.

 

The hand-pumped portable version is very popular with Kirtan Jathas along with theTabla and these form the main type of instruments used by Ragis during the performance of Kirtan.The Harmonium was invented in Europe in Paris in 1842 by Alexandre Debain, though there was concurrent development of similar instruments elsewhere. During the mid-19th century missionaries brought hand-pumped harmonium to India, where it quickly became popular due to its portability and its low price. Its popularity has stayed intact to the present day, and the harmonium remains an important musical instrument in many types of Indian music, as well as being commonly found in Indian homes.In Indian music, the Harmonium is considered to be one of the most versatile instruments. The harmonium is used in classical, semi-classical, and devotional music. It is usually used as an accompanying instrument for vocalists in classical music. However, some musicians have begun playing the harmonium as a solo instrument. One of the largest pioneers of this style is Pandit Tulsidas Borkar of Mumbai. 

हारमोनियम (Harmonium) एक संगीत वाद्य यंत्र है जिसमें वायु प्रवाह किया जाता है और भिन्न चपटी स्वर पटलों को दबाने से अलग-अलग सुर की ध्वनियाँ निकलती हैं। इसमें हवा का बहाव पैरों, घुटनों या हाथों के ज़रिये किया जाता है हालांकि भारतीय उपमहाद्वीप में इस्तेमाल होने वाले हरमोनियमों में हाथों का प्रयोग ही ज़्यादा होता है। हारमोनियम का आविष्कार यूरोप में किया गया था और १९वीं सदी के बीच में इसे कुछ फ़्रांसिसी लोग भारत-पाकिस्तान क्षेत्र में लाए जहाँ यह सीखने की आसानी और भारतीय संगीत के लिए अनुकूल होने की वजह से जड़ पकड़ गया।

हारमोनियम (अंग्रेज़ी:Harmonium) पेटी या रीड ऑर्गन भी कहलाता है। हारमोनियम मुक्त पत्ती वाला कुंजी-फलक वाद्य है, जो हाथ या पैर से संचालित धौंकनी के द्वारा दबाव-समकारी वायु भंडार से हवा फेंकता है, जो धातु के खांचों में कसी गई धातु-पत्तियों को कंपन देती है और वाद्य बजता है। हारमोनियम में कोई नलिका नहीं होती है और स्वर पत्ती के आकार पर निर्भर करता है। पत्तियों के अलग-अलग समूह भिन्न सुर देते हैं,ध्वनि की गुणवत्ता समूह की प्रत्येक पत्ती के चारों ओर वाले सुर-कक्ष के विशिष्ट आकार एवं आकृति पर निर्भर करती है; उदाहरणस्वरूप, संकुचित कक्ष शक्तिशाली कंपन एवं तीक्ष्म सुर निकालते हैं। सुर की प्रबलता घुटने से संचालित वायु कपाट या सीधे धौंकनी पैडल को रोककर, नियंत्रैत की जाती है, ताकि हवा आधार के बाहर से गुज़रे। वाद्य का विस्तार सामान्यतः चार या पाँच सप्तक होता है।

हारमोनियम समूह का सबसे पहला बाजा फ़िसहार्मोनिका था, जिसका निर्माण 1818 में वियना में एंटन हिक्ल ने किया था। इसे चीन के माउथ ऑर्गन या शेंग से प्रेरणा मिली, जिसे 1970 के दशक में रूस लाया गया था, जिसने यूरोप को मुक्त पत्ती से परिचित कराया और कुछ भौतिकशास्त्रियों एवं संगीतज्ञों में रुचि जगाई। अब विलुप्त अन्य क़िस्में (जैसे जॉन ग्रीन का सेराफ़ीइन), 1840 में पेरिस में अलेक्ज़ांद्रे दिबेन द्वारा निर्मित हारमोनियम से पहले अस्तित्व में थीं। 1850 के बाद मुख्य सुधार पेरिस में विक्टर मस्तेल तथा अमेरिकामें जेकब एस्टे ने किया।

हारमोनियम लोकप्रिय गिरिजाघर एवं घरेलू वाद्य यंत्र रहा, जब तक कि 1930 के दशक के बाद इलैक्ट्रॉनिक बाजे ने उसे बाज़ार से बाहर नहीं कर दिया। इस वाद्य यंत्र के लिए संगीत रचनाएँ तथा बोहेमियाई संगीतज्ञ एंतोनियन द्वोरज़ाक की दो वॉयलिन, चेलो एवं हारमोनियम के लिए चतुर्वाद्य-रचना शामिल हैं।  

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