M U S I C

Music is an art form and cultural activity whose medium is sound and silence. The common elements of music are pitch (which governs melody and harmony), rhythm (and its associated concepts tempometer, and articulation), dynamics (loudness and softness), and the sonic qualities of timbre and texture (which are sometimes termed the "color" of a musical sound). Different styles or types of music may emphasize, de-emphasize or omit some of these elements. Music is performed with a vast range ofinstruments and with vocal techniques ranging from singing to rapping, and there are solely instrumental piecessolely vocal pieces (such as songs without instrumentalaccompaniment) and pieces that combine singing and instruments. The word derives from Greek μουσική (mousike; "art of the Muses"). In its most general form, the activities describing music as an art form include the production of works of music (songs, tunes, symphonies, and so on), the criticism of music, the study of the history of music, and the aesthetic examination of music

 

Ancient Greek and Indian philosophers defined music as tones ordered horizontally as melodies and vertically as harmonies. Common sayings such as "the harmony of the spheres" and "it is music to my ears" point to the notion that music is often ordered and pleasant to listen to. However, 20th-century composer John Cage thought that any sound can be music, saying, for example, "There is no noise, only sound."

ध्वनि जो रस की सृष्टि करे, संगीत कहलाती है। गीत, वादन व नृत्य ये तीनों ही संगीत हैं। संगीत नाम इन तीनों के एक साथ व्यवहार से पड़ा है। गाना, बजाना और नाचना प्रायः इतने पुराने है जितना पुराना आदमी है। बजाने और बाजे की कला आदमी ने कुछ बाद में खोजी-सीखी हो, पर गाने और नाचने का आरंभ तो न केवल हज़ारों बल्कि लाखों वर्ष पहले उसने कर लिया होगा, इसमें संदेह नहीं। कब से मनुष्य ने गाना प्रारंभ किया, यह बतलाना कठिन है जितना कि कब से उसने बोलना प्रारंभ किया। जब स्वर और लय व्यवस्थित रूप धारण करते हैं तब एक कला का प्रादुर्भाव होता है और इस कला को संगीत, म्यूजिक या मौसीकी कहते हैं।

युद्धउत्सव और प्रार्थना या भजन के समय मानव गाने बजाने का उपयोग करता चला आया है। ऐसा जान पड़ता है कि भारत में भरत के समय तक गान को पहले केवल 'गीत' कहते थे। वाद्य में जहाँ गीत नहीं होता था, केवल दाड़ा, दिड़दिड़ जैसे शुष्क अक्षर होते थे, वहाँ उसे 'निर्गीत' या 'बहिर्गीत' कहते थे और नृत्त अथवा नृत्य की एक अलग कला थी। किंतु धीरे-धीरे गान, वाद्य और नृत्य तीनों का "संगीत" में विलय हो गया ।

संगीत का आदिम स्त्रोत प्राकृतिक ध्वनियाँ ही है। प्राक् संगीत-युग में मनुष्य के प्रकृति की ध्वनियों और उनकी विशिष्ट लय को समझने की कोशिश की। प्रकृति की वे ध्वनियाँ जिन्होंने मनुष्य के मन-मस्तिष्क को स्पर्श कर उल्लासित करे, वही सभ्यता के विकास के साथ संगीत का साधन बन सकता है। हालांकि विचारों में भी मतभेद है। 

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