Indian Classical 

Raaga Alhaiya Bilaval
राग अल्हैया बिलावल

Alhaiya Bilaval is a Hindustani classical raga. It is the most commonly performed raga of a large group of ragas that are mainly based on a scale more or less identical to the western major scale. For this reason, that scale itself is known as the Bilaval Thaat. It is often simply referred to as Bilawal, although in the 17th century Alhaiya and Bilawal may have been separate ragas
 

Arohana & Avarohana
Arohana
S GR G P ND N S'
Avarohana S' ND hn D P M G MR S

 

Vadi & Samavadi
Vadi dha
Samavadi ga
Komal Swar: N (Vakra) in Avroh
Varjit Swar: M in Aaroh

 

Samay (Time)
Morning, around 6AM - 9AM

 

 राग बिलावल में कोमल निषाद के प्रयोग से राग अल्हैया बिलावल का निर्माण हुआ है। इसके अवरोह में निषाद कोमल का प्रयोग अल्प तथा वक्रता से किया जाता है जैसे ध नि१ ध प। यदि सीधे अवरोह लेना हो तो शुद्ध निषाद का प्रयोग होगा जैसे सा' नि ध प म ग रे सा। इसी तरह अवरोह में गंधार भी वक्रता से लेते हैं जैसे - ध नि१ ध प ; ध ग प म ग रे सा। इस राग का वादी स्वर धैवत है परन्तु धैवत पर न्यास नहीं किया जाता। इसके न्यास स्वर पंचम और गंधार हैं। इस राग में धैवत-गंधार संगती महत्वपूर्ण है और इसे मींड में लिया जाता है। यह उत्तरांग प्रधान राग है, इसका चलन और विस्तार तार सप्तक में अधिकता से किया जाता है। इस राग की प्रकृति में करुण रस का आभास होता है। इस राग में ख्याल, तराने, ध्रुवपद आदि गाये जाते हैं।


आरोह एवं अवरोह 
आरोह - सा रे ग प ध नि सा'

अवरोह - सा' नि ध प ध नि१ ध प म ग रे सा

 

वादी एवं संवादी 

धैवत (ध)

गंधार (ग)

 

पकड़ एवं चलन 
पकड़ 

  1. ग, म रे ग प , ध , नि सा.

 

आलाप

  1. सा रे सा , ग , म रे सा , .नि , .ध .प .ध .नि सा, ग , रे ग प , म ग , म रे सा

  2. सा , ग , रे ग , प , म ग रे ग , प , ध प म ग , म रे ग प , म ग , रे सा

  3. सा रे ग , म रे सा , ग , ग प ध प , म ग , रे ग प , ध नि सा

 

समय 

दिन का प्रथम प्रहर 

 

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