Indian Classical 

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राग भैरव

राग भैरव प्रभात बेला का प्रसिद्ध राग है। इसका वातावरण भक्ति रस युक्त गांभीर्य से भरा हुआ है। यह भैरव थाट का आश्रय राग है। इस राग में रिषभ और धैवत स्वरों को आंदोलित करके लगाया जाता है जैसे - सा रे१ ग म रे१ रे१ सा। इसमें मध्यम से मींड द्वारा गंधार को स्पर्श करते हुए रिषभ पर आंदोलन करते हुए रुकते हैं। इसी तरह ग म ध१ ध१ प में निषाद को स्पर्श करते हुए धैवत पर आंदोलन किया जाता है। इस राग में गंधार और निषाद का प्रमाण अवरोह में अल्प है। इसके आरोह में कभी कभी पंचम को लांघकर मध्यम से धैवत पर आते हैं जैसे - ग म ध१ ध१ प।इस राग में पंचम को अधिक बढ़ा कर गाने से राग रामकली का किंचित आभास होता है इसी तरह मध्यम पर अधिक ठहराव राग जोगिया का आभास कराता है। भैरव के समप्रकृतिक राग कालिंगड़ा व रामकली हैं।


आरोह एवं अवरोह 
आरोह - सा रे१ ग म प ध१ नि सा'

अवरोह - सा' नि ध१ प म ग रे१ सा

 

वादी एवं संवादी 

धैवत (ध)

रिषभ (र)

 

पकड़ एवं चलन 
पकड़ 

  1. स ग म प प।

 

समय 

सुबह का प्रथम प्रहर 

 

Raag Bhairav by President BIMMA

Raaga Bhairav 

Raag Bhairav is often referred to as the king of morning Raags. It produces a rich atmosphere. The Rishabh and Dhaivat used here are oscillating which is strongly recommended in this Raag and it makes the Raag mood intense.Rishabh and Pancham are occasionally skipped in Aaroh like: S G m d P or G m d N S'. But in Avroh, Rishabh and Pancham are Deergh like S' N d P or P m G m r r S. In Avroh, Gandhar is skipped like: G m r S. Madhyam is an important note.

 

Aroh & Avaroh
Aroh
Sa, Re, Ga, Ma, Pa,  Dha, Ni, Sa'
Avaroh 

Sa', Ni,  Dha, Pa, Ma, Ga, Re, Sa

 

Vadi & Samavadi
Vadi : dha
Samavadi : Re

 

Pakad

Ga Ma Dha Dha Pa Ga Ma Re Re Sa

 

Samay (Time)
Early morning 

 

Student's  Activities

Vocal Training

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