Indian Classical 

Raaga Durga
राग दुर्गा

This is a very popular nocturnal melody which is also very sweet to listen to. R R m R; ,D ,D S clarifies the Raag format. Though originally from South Indian Classical Music, this Raag is equally suitable for Hindustani Classical Music style. Khayals and Bandishen and very nicely composed and people practically sway and dance to the melodic compositions. Pancham should not be a resting note in Avroh.

This Raag creates a very soothing atmosphere which is neither very deep nor very playful. Following are the illustrative combinations of this Raag:

R m P D ; P D m ; m P D D m ; D m P D S' ; D D S' S' D D m; m P D ; m R ,D S;

 


Aroha & Avaroha
The scale of Khamaj uses only Shuddh swaras.
Aroha     : S R m P D S'
Avaroha : S' D P D m R S ,D S ;

 

Vadi & Samavadi
Vadi           : Madhyam

Samavadi : Shadj

 

Pakad & Chalan

Chalan

D D S' S' D D m; m P D ; m R ,D S;

 

Time

2nd Prahar of the Night

 

 

 

रात्रि के रागों में राग दुर्गा बहुत मधुर और सब लोगों का प्रिय राग है। रे रे म रे; ,ध ,ध सा - यह स्वर संगती राग को स्पष्ट बनाती है। सभी शुद्ध स्वर लगने के बावजूद इस राग का एक विशिष्ट वातावरण पैदा होता है जो की स्थाई प्रभाव डालने में समर्थ है। यह मूलतः दक्षिण भारतीय संगीत का राग है जो उत्तर भारतीय संगीत में भी लोकप्रिय हुआ है। मध्यम स्पष्ट लगने से यह राग खिलता है। इस राग में अवरोह में पंचम पर विश्रांति नही देनी चाहिये।

इस राग की प्रकृति न तो अधिक गंभीर है और न ही अधिक चंचल। इसमें ख्याल, तराने आदि गाये जाते हैं। यह स्वर संगतियाँ राग दुर्गा का रूप दर्शाती हैं:

रे म प ध; प ध म; म प ध ध म; ध म प ध सा'; ध ध सा'; सा' ध ध म; म प ध ; म रे ; ,ध सा;


आरोह एवं अवरोह 
आरोह     : सा रे म प ध सा'

अवरोह    : सा' ध प ध म रे सा ,ध सा; 

 

वादी एवं संवादी 

मध्यम

षड्ज

 

पकड़ एवं चलन 
पकड़ 

ध ध सा'; सा' ध ध म; म प ध ; म रे ; ,ध सा;

 

समय 

रात्रि का दूसरा प्रहर

 

STUDENT'S ACTIVITIES

Demo by Students

Tutorial Audio

Instrumental - Raag Durga

Training by Senior Faculty

Powered By Beeps Studio © 2019