Indian Classical 

Raaga Yaman Kalyan
राग यमन कल्याण 

Yaman emerged from the parent musical style of Kalyan, itself a style of classical Carnatic musical tradition calledthaat. Considered to be one of the most fundamental ragas in the Hindustani Classical tradition, it is thus often one of the first ragas taught to students. In the context of traditional standards of performance, Yaman ragas are considered suitable to play at any time of the day, but they are traditionally performed in the evening. 

Yaman's Jati is a Sampurna raga; the ascending Aaroha scale and the descending style of the avroha includes all seven notes in the octave. All the scale notes (called swaras) in the raga are Shuddha, the exception being TeevraMadhyam or prati madhyamam. The notes of the raga are considered analogous to the western Lydian mode, which was the predominant scale used in classical antiquity, before being usurped by those of the pre-Modern era.

 


Aroha & Avaroha
The scale of Khamaj uses only Shuddh swaras.
Aroha     : Sa Re Ga Ma(Kori Ma/trivra Ma i.e. Ma#) Pa Dha Ni Sa
Avaroha : Sa Ni Dha Pa Ma((Kori Ma/trivra Ma i.e. Ma#)) Ga Re Sa

 

Vadi & Samavadi
Vadi           : Gandhar - Ga 

Samavadi : Nishad - Ni 
 

Pakad & Chalan

(Ma#)-Pa-/Ma(Kori Ma/trivra Ma

i.e.

Ma#-Pa-Dha/Dha-Ni-Sa'(upper octave)

 

Time

Night (Pratham Prahar)

 

 

 

इस राग का प्राचीन नाम कल्याण है। कालांतर में मुगल शासन के समय से इसे यमन कहा जाने लगा। इस राग के अवरोह में जब शुद्ध मध्यम का अल्प प्रयोग गंधार को वक्र करके किया जाता है, तब इस प्रकार दोनों मध्यम प्रयोग करने पर इसे यमन कल्याण कहते हैं। 
इस राग का वादी स्वर गंधार, सप्तक के पूर्वांग में होने के कारण यह पूर्वांग प्रधान राग है। इसलिये यमन का स्वर विस्तार सप्तक के पूर्वांग तथा मंद्र सप्तक में विशेष रूप से उभर कर आता है। आलाप और तानों का प्रारंभ अधिकतर निषाद से किया जाता है जैसे - ,नि रे ,नि ,ध सा ; ,नि रे ; ,नि ग ; ,नि म् ग; आदि। आरोह में पंचम का प्रयोग कुछ कम किया जाता है जैसे - म् ध प ; म् ध नि सा', इससे राग का सौन्दर्य निखर आता है। आलाप में अवरोह में म् ग ; म् रे ग ; यह राग वाचक स्वर संगति है अतः म् ग रे सा; लेने की अपेक्षा म् रे ग रे सा; यह लेना राग की सुंदरता को निखारता है। तानों में म् ग रे सा निःसंकोच लिया जाता है।​


आरोह एवं अवरोह 
आरोह     : नि रे सा ; ,नि रे ग म् प ध नि सा'

अवरोह    : सा' नि ध प म् ग रे सा ; ,नि रे सा

 

वादी एवं संवादी 

गंधार (ग)

निषाद (नि)

 

पकड़ एवं चलन 
पकड़ 

  1. 'न - र - ग - म - प - र - ग - र - 'न - र - स

 

समय 

रात्रि का प्रथम प्रहर

 

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Instrumental - Raag Yaman

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