Powered By Beeps Studio © 2019

In the 1960s, a short-lived trend arose for the use of the sitar in Western popular music, with the instrument appearing on tracks by bands such as The Beatles, The Doors, The Rolling Stones and others. The Hindi and Urdu word sitar originally derives from Persian seh + tar, literally meaning "three strings." Another etymology is that it may be derived from Sanskrit words saptatantri veena(Sanskrit- seven stringed veena),which later was called as sattar(Hindi-seven strings) and then eventually became sitar. The instrument is thought to have been a version of the Veena, another prominent instrument in Carnatic and Hindustani music, altered in order to conform with Mughal tastes.

 

The sitar flourished in the 16th and 17th centuries and arrived at its present form in 18th century India, gaining prominence in the royal court of the Mughal Empire based in Northern India. The instrument is balanced between the player's left foot and right knee. The hands move freely without having to carry any of the instrument's weight. 

 

The player plucks the string using a metallic pick orplectrum called a mizraab. The thumb stays anchored on the top of the fretboard just above the main gourd. Generally only the index and middle fingers are used for fingering although a few players occasionally use the third. A specialized technique called "meend" involves pulling the main melody string down over the bottom portion of the sitar's curved frets, with which the sitarist can achieve a seven semitone range ofmicrotonal notes (however, because of the sitar's movable frets, sometimes a fret may be set to a microtone already, and no bending would be required). Adept players bring in charisma through use of special techniques like Kan, Krintan, Murki, Zamzama etc. They also use special Mizrab Bol-s, as in Misrabani and create Chhand-s even in odd-numbered Tal-s like Jhoomra.

सितार एक साहसपूर्ण तारवाला हिन्दुस्तानी संगीत और भारतीय शास्त्रीय संगीत में मुख्य रूप से प्रयोग किया जाता है। सितार की उत्पत्ति वीना से हुई यह माना जाता है, यह एक प्राचीन भारतीय संगीत साधन है, जो एक फारसी साधन के बाद एक मुगल दरबार संगीतकार द्वारा पेश किया गया था सितार को मुगल संरक्षक के स्वाद के साथ अनुरूप करने के लिए और उसका नाम सेतार (तीन तार अर्थ) दिया गया | सितार 16 वीं और 17 वीं शताब्दी में विकसित हुई और 18 वीं सदी के भारत में अपने मौजूदा स्वरूप पर पहुंचे इसकी बनावट तार, पुल के डिजाइन, एक लंबी गर्दन और एक खोखले लौकी के आकार गूंज चैम्बर से अपनी विशिष्ट स्वर और गूंज निकलता है।  सितार, तानपूरा से मीलता- जुलता साधन है  सिवाय फ्रेट्स के | 1950 के दशक और 1960 के दशक के शुरू मे सितार का व्यापक रूप से प्रयोग मे तथा दुनिया में लोकप्रिय पंडित रविशंकर द्वारा किया गया|

 

1960 के दशक में, सितार का प्रयोग एक पश्चिमी लोकप्रिय संगीत में  उपयोग किया गाया  बीटल्स, रोलिंग स्टोन्स नेभी अपने बैंड मे इसको शामिल किया  मूल रूप से फारसी सेह से हिंदी और उर्दू शब्द सितार + टार, जिसका शाब्दिक अर्थ लेती हैं "तीन तार।" यह भी माना जाता है की संस्कृत शब्द सप्ततन्त्री वीणा (सात तारवाला वीणा ), जो बाद में हिंदी-सात तार) के रूप में सत्तार बुलाया गया  और फिर एक आखिरकार  सितार ही इसका नाम प्रसिद्धि पाया। सितार  हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में सितार का प्रयोग खूब होता है|

 

वादक स्ट्रिंग को orplectrum नामक धातु से बजाते है जिसको Mizraab  कहा जाता है अंगूठे सिर्फ मुख्य लौकी के ऊपर fretboard के शीर्ष पर लंगर डाले रहता है। आम तौर पर केवल सूचकांक और मध्यम उंगलि, ही प्रयोग मे लाते है कुछ वादक ही कभी कभी तीसरे उंगली का उपयोग करते हैं।