Staff  Notation for Guitar

Western Swaralipi - System
Based on all the other systems in the world, four Swaralipi Swaralipi-based methods. The names of four of them are:
Solfa-Swaralipi - Methodology
Nyums-Swaralipi - Methodology
Chiv-Swaralipi - Methodology
Staff Swaralipi - Methodology

Solfa-Swaralipi-system
As the name of the notes 'sa, re, c, In, W, D, R' are; Similarly, in Western countries Solfa-Swaralipi-name system under the DOE notes (Do), Ray (Re), m (Me), Fa (Fa), sleep (Sol), La (La), Si (Si) are . That bit, Ray, c, In, W, Th, Ni, etc., thus write:
Do, Re, Mi, Fa, So, La, Si.

Nyums-Swaralipi-system
Swaralipi-up in the lap of the practice of religion and the churches of Rome grew. For the promotion of music sung in churches This method quickly spread. Religious songs to indicate this method highly publicized. Breaks, short breaks and dashes and lines that criss-cross the tone in this method is used to indicate locations. Indian music on Vedkalin Hrichaon Similar signs are found.

Chiv-Swaralipi-system
In the eighteenth century by the French mathematician named Ingur Chiv delivered innovative accents methodology, corresponding to the 'Chiv notation' is known for. The notes to subserve math scores are used, and to reflect the higher tone-down points are above and below the set point. In the Sama Veda Hrichaon our 1, 2, 3, 4 tone signals.

Swaralipi-system staff
Is a modified form of the method Nyums-Swaralipi. The five horizontal lines, column (Staff) is used by Ankit vowels in the middle. The main feature of this method is that it is shown with a vocal timbre, the tone of the same sign, indicating the rhythm and timbre. This method has spread in most countries nowadays. This method to reveal the subtlest expressions all round, and therefore also the number of Indian artists, especially film-music-director go on employing the same.

BEGINNER LEVEL

INTERMEDIATE LEVEL

ADVANCED LEVEL

पाश्चात्य स्वरलिपि - पध्दति

विश्व में चार स्वरलिपि पध्दतियों के आधार पर ही अन्य सभी स्वरलिपि--पद्धतियाँ आधारित हैं। उन चारों के नाम इस प्रकार हैं:

  1. सोल्फा-स्वरलिपि--पद्धति  

  2. न्युम्स-स्वरलिपि--पद्धति 

  3. चीव-स्वरलिपि--पद्धति 

  4. स्टाफ-स्वरलिपि--पद्धति 

 

सोल्फा-स्वरलिपि-पध्दति

जिस प्रकार भारतीय स्वरों के नाम 'सा, रे, ग, म, प, ध, नि' हैं; उसी प्रकार पाश्चात्य देशों में सोल्फा-स्वरलिपि-पद्धति के अन्तर्गत स्वरों के नाम डो(Do), रे(Re), मी(Me), फा(Fa), सो(Sol), ला(La), सी(Si) हैं। अर्थात सा, रे, ग, म, प, ध, नी इत्यादि को इस प्रकार लिखेंगे:

डो, रे, मी, फा, सो, ला, सी।

न्युम्स-स्वरलिपि-पद्धति

यह स्वरलिपि-पद्धति धर्म की गोद में पली और रोम के चर्चों से विकसित हुई। चर्चों में गाये जाने वाले संगीत के प्रचार के लिये इस पद्धति का तीव्रता से प्रसार हुआ। धार्मिक गीतों का संकेत करने के लिये इस पद्धति का बेहद प्रचार हुआ। विराम, स्वल्प विराम तथा डैश और आड़ी-टेढ़ी रेखाओं से ही इस पद्धति में स्वर स्थानों को इंगित किया जाता है। भारतीय संगीत में वेदकालीन ॠचाओं पर भी इसी प्रकार के चिन्ह पाए जाते हैं।

चीव-स्वरलिपि-पद्धति

अठारहवीं सदी में फ्रांस के ईंगुर चीव नामक गणितज्ञ ने इस अभिनव स्वरांकन-पद्धति को जन्म दिया, इसी लिए यह 'चीव नोटेशन' के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसमें स्वरों को दिग्दर्शित करने के लिए गणित के अंक प्रयोग में लाए जाते हैं, तथा उँचे-नीचे स्वर दर्शाने के लिए अंकों के उपर और नीचे बिंदु लगा दिए जाते हैं। हमारे सामवेद के ॠचाओं में भी 1, 2, 3, 4 स्वर संकेत मिलते हैं।

स्टाफ-स्वरलिपि-पद्धति

यह न्युम्स-स्वरलिपि-पद्धति क ही परिवर्धित रुप है। पाँच आड़ी लकीरों का स्तंभ (Staff) बनाकर उसके बीच में स्वरों को अंकीत किया जाता है। इस पद्धति की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें स्वर ताल को एक साथ दिखाया जाता है, अर्थात एक ही चिन्ह में स्वर, ताल एवं लय का संकेत मिल जाता है। आजकल अधिकांश देशों में इसी पद्धति का प्रचार प्रसार हुआ है। सूक्ष्मतम भावों को प्रकट करने के लिए यह पद्धति सर्वांगीण है, इसी लिए अनेक भारतीय कलाकार भी, विशेषकर फिल्म-संगीत-निर्देशक इसी को अपनाते चले जा रहे हैं।

Powered By Beeps Studio © 2019